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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)
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श्लोक 317
श्लोक
2.6.317
इतस् ततो निपतिता
गोप-नारीः पशूंश् च सः
वर्जयन् वक्र-गत्याशु
रथं तं निरसारयत्
अनुवाद
उसने जल्दी से रथ को भगा दिया, तथा इधर-उधर गिरे पशुओं और ग्वालिनों से बचने के लिए अपना रास्ता बदल लिया।
He quickly drove the chariot away, and changed his course to avoid the animals and milkmaids that had fallen here and there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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