vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री बृहत् भागवतामृत
»
खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
»
अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)
»
श्लोक 301
श्लोक
2.6.301
आरुरोह रथं हरिः
साग्रजो गोपिका-लग्नां
दृष्टिं यत्नान् निवर्तयन्
अनुवाद
भगवान हरि और उनके बड़े भाई उस रथ पर सवार हुए, जिसे अक्रूर शीघ्रता से लाए थे। बड़ी कठिनाई से कृष्ण ने गोपियों से अपनी दृष्टि हटा ली।
Lord Hari and his elder brother boarded the chariot that Akrura had hastily brought. With great difficulty, Krishna averted his gaze from the gopis.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×