श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 298
 
 
श्लोक  2.6.298 
कथञ्चिद् भगवान् धैर्यम्
आलम्ब्याश्रूणि मार्जयन्
स्वस्य तासां च नेत्रेभ्यो
’ब्रवीद् एतत् स-गद्गदम्
 
 
अनुवाद
भगवान ने किसी तरह अपने को संभाला। अपनी और गोपियों की आँखों से आँसू पोंछते हुए, भाव से रुँधे हुए स्वर में बोले।
 
The Lord somehow composed himself. Wiping the tears from his eyes and those of the gopis, he spoke in a voice choked with emotion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)