श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 297
 
 
श्लोक  2.6.297 
श्री-सरूप उवाच
इत्य् एवम्-आदिकं काकु-
कुलं ता विदधुस् तथा
येन तत्रत्यम् अखिलं
रुरोद च मुमोह च
 
 
अनुवाद
श्री सरूप ने कहा: इस प्रकार गोपियों ने बहुत से करुण विलाप किये, जिससे वहाँ उपस्थित सभी लोग रो पड़े और उनके होश उड़ गए।
 
Sri Sarupa said: Thus the Gopis uttered many pitiful laments, which made all those present weep and lose their senses.
तात्पर्य
सभी जीवित प्राणी गोपियों की शिकायतों का इस प्रकार प्रतिउत्तर दे रहे थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)