रे निर्दये ’रे धिषणा-विहीने
वत्सं निजं व्याघ्र-करे समर्प्य
शक्तासि दाहार्हम् इदं प्रवेष्टुं
रिक्तं गृहं तेन कथं त्वम् एका
अनुवाद
"हे निर्दयी, विवेकशून्य स्त्री! देख, तूने अपने बछड़े को बाघ के हाथों में सौंप दिया है। यह खाली घर तो जलने लायक है। तू इसमें अकेली कैसे प्रवेश कर सकती है?"
"O cruel, devoid of reason, woman! Look, you have handed over your calf to the tiger. This empty house is fit to burn. How can you enter it alone?"
तात्पर्य
गऊ जैसा कम बुद्धिमान जानवर भी अपने बछड़े को मारने के लिए किसी भी बघे को तनिक भी सहन नहीं करेगा। तो यशोदा अपने बेटे को कंस के नौकर को कैसे सौंप सकती है? और ऐसा करने के बाद, वह घर में अकेली कैसे लौट सकती है जहाँ कृष्ण नहीं होगा?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥