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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)
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श्लोक 265
श्लोक
2.6.265
रात्राव् आकर्ण्य तां वार्तां
लोका गोकुल-वासिनः
व्यलपन् बहुधा सर्वे
रुदन्तो मुमुहुर् भृशम्
अनुवाद
जिस रात गोकुलवासियों ने अक्रूर के आगमन का समाचार सुना, वे सब तरह-तरह से विलाप करने लगे। वे बार-बार रोते और बेहोश हो जाते।
The night the people of Gokul heard the news of Akrura's arrival, they all began to lament in various ways. They repeatedly wept and fainted.
तात्पर्य
व्रजवासी सभी जानते थे कि अक्रूर कौन हैं और क्यों आए हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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