श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 257
 
 
श्लोक  2.6.257 
गगन-स्पृङ्-महा-कायौ
नादेन प्राणिनो ’खिलान्
निपातयन्तौ भू-पृष्ठे
युगपद् व्रजम् आगतौ
 
 
अनुवाद
दोनों एक साथ ग्वालों के गांव में प्रवेश कर गए, उनके विशाल शरीर आकाश को छू रहे थे, उनकी दहाड़ से सभी लोग जमीन पर गिर पड़े।
 
Both of them entered the cowherds' village together, their huge bodies touching the sky, their roar making everyone fall to the ground.
तात्पर्य
कालिया को वश में करने के लीला में करुण और वीर रस की मिली-जुली अनुभूति होती थी, पर अगली लीला पूर्ण वीर रस की है। इस लीला में कंस के मित्र प्रसिद्ध राक्षस केशी तथा अरिष्ट एक साथ ही व्रज में प्रकट हुए और विशालकाय पशु रूप धारण करके गोप ग्राम में आतंक मचाया तथा गायों को अपने भारी पैरों से रौंदने लगे। श्रील सनातन गोस्वामी कहते हैं कि ये राक्षस गोकुल नाम के स्थान को ही नष्ट करने पर तुल गये। इस शब्द से उनका अभिप्राय गोपों के गाँव और गायों के झुण्ड दोनों से है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)