अथा व्रजे महतोपाताः
त्रि-विधा ह्यति-दारुणाः
उत्पतुर भुवि दिव्यात्मनि
आसन्न-भय-शंसिनाः
"वृंदावन क्षेत्र में भयंकर प्रलय के तीनों प्रकार के संकेत उभरे - वे जो पृथ्वी पर थे, वे जो आकाश में थे, और वे जो जीवित प्राणियों के शरीर में थे - जो आसन्न खतरे की घोषणा करते थे।" (भागवतम १०.१६.१२)
