श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 216
 
 
श्लोक  2.6.216 
तत्रापि यां प्रति प्रेम-
विशेषो ’स्य यदेक्ष्यते
तदा प्रतीयते कृष्ण-
स्यैषैव नितरां प्रिया
 
 
अनुवाद
फिर भी जब कृष्ण किसी गोपी के प्रति विशेष प्रेम प्रदर्शित करते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि वह उन्हें सर्वाधिक प्रिय है।
 
Yet when Krishna shows special love for a Gopi, it becomes clear that she is most dear to him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)