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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)
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श्लोक 200
श्लोक
2.6.200
गोलोक-वासिनां यत् तत्
सर्वतो ’प्य् अधिकाधिकम्
सुखं तद् युक्त्य्-अतिक्रान्तं
दध्याद् वाचि कथं पदम्
अनुवाद
लेकिन गोलोकवासियों का सुख किसी भी अन्य सुख से कहीं बढ़कर है। वह तर्क से परे है, तो शब्दों के लिए जगह कैसे दे सकता है?
But the happiness of the inhabitants of Goloka is far greater than any other. It transcends logic, so how can it be described in words?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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