श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 175
 
 
श्लोक  2.6.175 
एवं व्यग्र-धिया याता-
यातं सा कुर्वती मुहुः
नव-प्रसूताम् अजयत्
सुरभिं वर-वत्सलाम्
 
 
अनुवाद
इस प्रकार माता यशोदा बार-बार व्याकुल होकर आगे-पीछे घूमकर उस गाय से भी अधिक प्रेम प्रकट करती थीं, जिसने अभी-अभी बछड़े को जन्म दिया हो।
 
Thus, Mother Yashoda, again and again, would become anxious and walk back and forth, expressing more love than a cow that has just given birth to a calf.
तात्पर्य
यशोदा और कृष्ण के बीच यह बातचीत कुछ देर तक चलती रही, लेकिन सारूप उसका वर्णन और आगे न बढ़ाना चाहता था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)