श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.6.17 
तस्य प्रिय-सुरामित्र-
परिवारस्य शङ्कया
नोत्सहन्ते यथा-कामं
विहर्तुं यादवाः सुखम्
 
 
अनुवाद
कंस के भय से, जिसके परिवार और मित्र देवताओं के शत्रु थे, यादवों को स्वतंत्रतापूर्वक आनंद लेने का साहस नहीं हुआ।
 
The Yadavas did not dare to enjoy themselves freely, for fear of Kamsa, whose family and friends were enemies of the gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)