श्री सरूप ने कहा: माता यशोदा ने ऐसा बार-बार कहा, ठीक व्रज की युवा कन्याओं के सामने, जो अभी-अभी आई थीं और जिनके चेहरों पर अब भय, हंसी और लज्जा के चिह्न चमक रहे थे।
Sri Sarup said: Mother Yashoda said this again and again, right in front of the young girls of Vraja, who had just arrived and whose faces now flashed with fear, laughter and shame.
तात्पर्य
मां यशोदा के नाम का अर्थ ही है कृष्ण की कीर्ति को बढ़ाने वाली (यशो ददौ) | गोपियाँ नंद महाराज के घर पहुंचीं जब वह कृष्ण की बिखरी हुई बालों की अवस्था के बारे में शिकायत कर रही थीं | उन्हें सुनकर उनको डर लगने लगा कि वह यह समझने लगेगी कि रात में कृष्ण क्या कर रहा था | फिर भी, वे मदद नहीं कर सके लेकिन उनके भोले-भाले बयानों पर हंसे और कृष्ण के साथ विहार के स्पष्ट संकेतों को देखकर शर्मिंदगी से सिकुड़ गए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥