श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 154
 
 
श्लोक  2.6.154 
बालाभिश् चपलाभिर् ह्यः
सन्ध्यायाम् अवधानतः
स्नानं न कारितं सम्यङ्
नाभ्यङ्गोद्वर्तने तथा
 
 
अनुवाद
कल शाम, उन चंचल लड़कियों ने उन्हें ठीक से नहलाया नहीं। उन्होंने तेल भी ठीक से नहीं लगाया और जो बचा था उसे भी नहीं पोंछा।
 
Last evening, those playful girls didn't bathe him properly. They didn't apply oil properly, and they didn't even wipe away any residue.
तात्पर्य
अगर उन मुर्ख लड़कियों ने कृष्ण को सावधानी से नहलाया होता, तो सोचा उसने, मैल निकल जाता।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)