नूनं काश्मीर-वर्णेयं
यमुना-तीर-मृत्तिका
न परित्याजिता हन्त
स्नानेनापि वपुः-सखी
अनुवाद
हे भगवान! यमुना तट की यह केसरिया मिट्टी—ऐसा लगता है कि स्नान करने से भी धुल नहीं पाई। यह तो उनके शरीर की अभिन्न सखी बन गई है।
Oh my God! This saffron soil from the banks of the Yamuna—it seems it hasn't been washed away even after bathing. It has become an inseparable companion of his body.
तात्पर्य
यह "लाल मिट्टी" वास्तव में गोपियों के स्तनों का कुम-कुम था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥