श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  2.6.130 
भ्रातुः स्मितं रुषं मातुस्
तस्यां तातस्य विस्मयम्
तन्वन् सखीनां मुग्धानाम्
आधिं तस्या द्विषां मुदम्
 
 
अनुवाद
कृष्ण के भाई मुस्कुराए, उनकी माता श्री राधिका पर क्रोधित हुईं और उनके पिता आश्चर्यचकित हुए। राधा की भोली-भाली सखियाँ दुःखी हुईं और उनके विरोधी प्रसन्न हुए।
 
Krishna's brothers smiled, his mother was angry with Sri Radha, and his father was astonished. Radha's innocent friends were saddened, and her opponents were delighted.
तात्पर्य
कृष्ण को कड़वी मिठाइयाँ लाने पर माता यशोदा बालिकाओं पर क्रोधित हुईं। नन्द आश्चर्यचकित थे और शंका कर रहे थे कि बालिकाएँ ऐसा कैसे कर सकती हैं। यद्यपि विरोधी दलों की गोपियाँ इस भूल से उत्साहित थीं, श्री राधिकाजी की भोली-भाली सखियाँ इस सोच से दुखी थीं कि लड्डुओं में शायद कुछ कड़वा मिला दिया गया होगा। हालाँकि, सखियों में से कुछ चतुर सखियाँ जान गई थीं कि यह तो एक मज़ाक था, जो श्री राधिकाजी के सौभाग्य को और भी अधिक उजागर करेगा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)