श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  2.6.126 
गोपिकाभिश् च मिष्टान्नम्
आनीय स्व-स्व-गेहतः
क्षीराज्य-शर्करा-पक्वं
यशोदाग्रे धृतं तदा
 
 
अनुवाद
गोपियाँ अपने घर से दूध, घी और चीनी से बनी बहुत सी मिठाइयाँ लायीं और उन्हें माता यशोदा के सामने रखा।
 
The Gopis brought many sweets made of milk, ghee and sugar from their homes and placed them in front of Mother Yashoda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)