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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)
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श्लोक 121
श्लोक
2.6.121
अन्यानि घृत-पक्वानि
रसाला-सहितानि च
दधि-दुग्ध-विकारोत्थ-
मिष्टान्नान्य् अपराण्य् अपि
अनुवाद
उन्होंने घी में तली हुई अन्य चीजें भी खाईं, तथा मीठा दही और दही व दूध के मिश्रण से बनी विभिन्न चीजें भी खाईं।
He also ate other things fried in ghee, and sweetened yogurt and various things made from a mixture of yogurt and milk.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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