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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)
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श्लोक 113
श्लोक
2.6.113
नन्दो भोजन-शालायाम्
आसीनः कनकासने
भोजनं कर्तुम् आरेभे
तथा तौ तस्य पार्श्वयोः
अनुवाद
नन्द भोजन कक्ष में अपने स्वर्ण आसन पर बैठ गए और दोनों भाइयों के साथ भोजन करने लगे।
Nanda sat on his golden seat in the dining room and started eating with both the brothers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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