श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  2.6.100 
स-भावं वीक्ष्यमाणास् ता
हस्तं संस्तभ्य यत्नतः
प्रवृत्ता नेत्र-कमले
तस्योज्ज्वलयितुं मुदा
 
 
अनुवाद
जब वे प्रेमपूर्वक गोपियों की ओर देख रहे थे, तब गोपियाँ अपने हाथों को स्थिर रखने का भरसक प्रयत्न कर रही थीं, और प्रसन्नतापूर्वक उनके कमल-नेत्रों को चमकाने के लिए उन पर काजल पोत रही थीं।
 
While He was lovingly looking at the gopis, they were trying their best to keep their hands steady, and were happily applying kajal to brighten His lotus eyes.
तात्पर्य
चूँकि कृष्ण की प्रेम भरी नज़र ने गोपियों को पुलकित किया, इस कारण उनके हाथ काँपने लगे और उन्हें कृष्ण का काजल साफ-साफ लगाने में कठिनाई होने लगी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)