वर्तमान श्लोक वर्णन करता है कि क्यों और कब गोलोकानाथ मथुरा में पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। उनके अवतरित होने का कारण अपनी स्वयं की इच्छाओं को संतुष्ट करना है; उन्हें प्रेम के सुपरचार्ज के आनंद का स्वाद लेने की उत्सुकता है। और वह समय जब वह अवतरित होते हैं द्वापर-युग के अंतिम सांसारिक वर्षों के दौरान है, वह युग जो अपने प्रभात से सांध्य तक देवताओं के 2,400 वर्षों तक चलता है। लेकिन जैसे कि हम प्रामाणिक शास्त्रों से जानते हैं, कृष्ण प्रत्येक द्वापर-युग के अंत में पृथ्वी पर नहीं आते हैं बल्कि ब्रह्मा के दिन में सातवें मन्वंतर के केवल अट्ठाईसवें द्वापर-युग में अवतरित होते हैं।
