श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  2.5.90 
मर्त्य-लोकान्तर-स्थस्य
मथुरा-गोकुलस्य च
माहात्म्यं सर्वतः श्रेष्ठम्
आश्चर्यं केन वर्ण्यताम्
 
 
अनुवाद
और भौतिक जगत के भीतर मथुरा जिले का गोकुल भी इतना महान है कि कोई भी इसकी आश्चर्यजनक महिमा का ठीक से वर्णन नहीं कर सकता।
 
And within the material world, Gokul of Mathura district is also so great that no one can properly describe its amazing glory.
तात्पर्य
गोकुल, गोलोक का पृथ्वी पर प्रत्यक्ष विस्तार, वैकुण्ठ से भी महान है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)