गोलोक अन्य सभी आध्यात्मिक ग्रहों से ऊपर है, क्योंकि यह हर तरह से श्रेष्ठ है। ब्रह्म-संहिता (5.43) बताती है:
गोलोक-नाम्नि निजा-धामनि तले च तस्य
देवी-महेश-हरि-धामसु तेसु तेषु
ते ते प्रभवा-निकया विहिताश्च येन
गोविंदम आदि-पुरुषं तमहं भजामी
"सबसे नीचे देवी-धाम [भौतिक दुनिया] है, उसके ऊपर महेश-धाम [महेश का निवास] है, महेश-धाम के ऊपर हरि-धाम [हरी का निवास] है, और इन सबसे ऊपर कृष्ण का अपना राज्य है, जिसका नाम गोलोक है। मैं आदिम भगवान गोविंद की पूजा करता हूं, जिन्होंने श्रेणीबद्ध लोकों के शासकों को उनके संबंधित अधिकार आवंटित किए हैं।" ब्रह्मांड के आठ आवरण, जिसकी अध्यक्षता दुर्गा करती हैं और भगवान शिव का निवास और भगवान हरि का वैकुंठ साम्राज्य सभी गोलोक के नीचे हैं।
