परम अद्भुत लीलाओं के सागर, भगवान कृष्ण ने अपने भक्तों के लिए अपनी दो सुंदर भुजाएँ प्रकट कीं, और किशोरवय की परिपक्वता से, जो किशोरवय की कृपा के स्पर्श से मृदुल हो गई, उनकी उत्कृष्ट भाव-भंगिमाओं ने उनके सेवकों के हृदय मोह लिए।
Lord Krishna, the ocean of supremely wonderful pastimes, revealed His two beautiful arms to His devotees, and with the maturity of adolescence, softened by the touch of adolescence's grace, His exquisite gestures captivated the hearts of His devotees.
तात्पर्य
युवा वयस्क विशेष रूप से सुंदर होते हैं, पर कृष्ण में युवावस्था की परिपक्व सुंदरता को बालसुलभ मासूमियत के अंशों द्वारा और अधिक मധुर बनाया गया है। उसे कभी भी उपेक्षित न छोड़ते हुए, आकर्षण के इस विशेष मिश्रण से उसकी शुद्ध भक्ति के साथ सेवा की जाती है, जैसे उसके देवता रूप का एक वफादार उपासक। चूंकि द्वारका के भक्त कृष्ण के सबसे प्रिय सेवक हैं, इसलिए वे उसकी सुंदरता को निरंतर देखने का आनंद ले सकते हैं। और जहां विष्णु के भक्त अपने भगवान को चार भुजाओं के साथ देखते हैं, वहीं द्वारका के निवासियों के बीच अधिक अंतरंग आमतौर पर उसे केवल दो के साथ देखते हैं। गोपा-कुमार ने देखा कि कैसे कृष्ण की मुस्कुराहटें, उनके मनभावन वचन, उनकी तिरछी नजरें और उनकी भौंहों की हरकतों ने सुधर्मा हॉल में द्वारकावासियों को आकर्षित किया। केवल प्रभु द्वारा अनुग्रहित भक्त ही ऐसे भावों के हृदय पर प्रभाव को जान सकते हैं, क्योंकि इसे पर्याप्त रूप से शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता है। कृष्ण के चंचल मनोरंजक कार्यकलापों का शाश्वत गहरा महासागर शब्दों और मन की परिसीमित शक्ति से परे है। इस कथन में, गोपा-कुमार ऐसे आकर्षणों के बारे में केवल संकेत कर सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥