श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  2.5.68 
तद्-उक्त्या नारदो हर्ष-
भराक्रान्त-मना हसन्
उत्प्लुत्योत्प्लुत्य चाक्रोशन्न्
इदम् आह सु-विस्मितः
 
 
अनुवाद
इन शब्दों से नारदजी का मन प्रसन्न हो गया और वे हँसने लगे, उछलने लगे और हर्ष से चिल्लाने लगे। आश्चर्यचकित होकर उन्होंने इस प्रकार कहा।
 
These words delighted Narada, who began laughing, jumping, and shouting with joy. Surprised, he said this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)