नाना-विधास् तस्य परिच्छदा ये
नामानि लीलाः प्रिय-भूमयश् च
नित्यानि सत्यान्य् अखिलानि तद्वद्
एकान्य् अनेकान्य् अपि तानि विद्धि
अनुवाद
भगवान के नाम, उनकी लीलाएँ, उनके प्रिय धाम और उनकी सेवा से संबंधित सभी वस्तुएँ अनेक रूप धारण कर सकती हैं। और तुम्हें यह जानना चाहिए कि जिस प्रकार ये सभी शाश्वत हैं, उसी प्रकार ये सभी एक भी हैं और अनेक भी।
The Lord's names, His pastimes, His beloved abode, and all things related to His service can take many forms. And you should know that just as they are eternal, they are also one and many.
तात्पर्य
जबकि कई विस्तार के विषय पर अभी भी, नारद इस अवसर का उपयोग यह बताने के लिए करते हैं कि भगवान के व्यक्तित्व के मनोरंजन, उनके प्रिय निवास जैसे कि श्री मथुरा, और कौस्तुभ मणि और सुदर्शन हथियार जैसे उनके अनुषंगी उसी विस्तार की शक्ति को प्रदर्शित करते हैं। यहाँ भूमि शब्द न केवल पृथ्वी को बल्कि किसी भी स्थान को दर्शाता है, और इसलिए वैकुण्ठ जैसे अन्य आध्यात्मिक क्षेत्रों को इंगित करता है। सर्वोच्च प्रभु की व्यक्तिगत संपत्ति, उनके नाम, उनके मनोरंजन, और उनके प्रकट होने के स्थान सभी स्वभाव से शुद्ध सत-चित-आनंद हैं, जैसे कि वह हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥