द्वारका में निवास करते हुए, मुझे भगवान कृष्ण की अद्भुत कृपा निरन्तर, प्रचुर मात्रा में प्राप्त होती रही। मैंने परमानंद की ऐसी धारा का आस्वादन किया कि न तो कोई उसे शब्दों में कह सकता था, न ही मन में उसकी कल्पना कर सकता था, यहाँ तक कि ब्रह्मा का जीवन भर का शुद्ध भक्त भी नहीं।
While living in Dwaraka, I received Lord Krishna's wonderful grace continuously and abundantly. I tasted a torrent of bliss that no one, not even a lifelong pure devotee of Brahma, could describe in words or imagine in the mind.
तात्पर्य
द्वारका में कृष्ण के गौरव निःसंदेह महान विद्वानों और रहस्यवादी योगियों की समझ से परे हैं। शरणागत भक्तजन भी मुश्किल से ही कभी मन या वाणी से उन गौरवों के समीप पहुँच पाते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥