श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.5.29 
दैवकी-नन्दनेनाथ
तेन किञ्चित् स्व-पाणिना
भोजितो ’हं स्वयं पश्चाद्
भुक्तं सन्तोषणाय मे
 
 
अनुवाद
देवकी के उस प्रिय पुत्र ने मुझे अपने हाथ से कुछ खिलाया और उसके बाद ही मेरी तृप्ति के लिए स्वयं कुछ खाया।
 
That beloved son of Devaki fed me with his own hands and only after that did he eat something himself to satisfy me.
तात्पर्य
देवकी के लाडले ने माँ को खुश करने के लिए खाना खाया। पर साथ ही साथ उनकी यह भी इच्छा थी कि उनके साथी भी खाएँ, जो वे सिर्फ़ उनकी मौजूदगी में ही खाते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)