श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 257
 
 
श्लोक  2.5.257 
अत एवोषितं तस्यां
व्रज-भूमौ चिरं मया
तत्रत्य-तत्-प्रिय-प्राणि-
वर्गस्याश्वासन-च्छलात्
 
 
अनुवाद
इसलिए मैंने भगवान के प्रिय भक्तों को सांत्वना देने के बहाने ब्रजभूमि में बहुत समय बिताया, जो वहां अपने प्राणों के अतिरिक्त कुछ भी नहीं बचाकर रहते थे।
 
So I spent a lot of time in Brajbhoomi under the pretext of consoling the beloved devotees of the Lord who lived there with nothing left except their lives.
तात्पर्य
वृज-भूमि में इतना समय बिताने का उद्देश्य क्या उद्धव का यह नहीं था कि कृष्ण द्वारा छोड़े जाने के दुख में उनको सांत्वना दी जाए? बाह्य रूप से चाहे ऐसा ही लगे, किन्तु ग्वालों और ग्वालियों को सांत्वना देना वास्तव में उद्धव के इस दौरे का उद्देश्य नहीं था। उनके दृष्टिकोण से वृज-वासियों को सांत्वना देने का कोई सवाल ही नहीं था। वे वृन्दावन गये उनसे कृष्ण-प्रेम की विधि सीखने।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)