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श्लोक 2.5.251  |
यया हृत्-क्षोभ-राहित्यान्
महा-कौतुकतो ’पि ते
वृत्तं भाव-विशेषेण
तत्-तल्-लोके ’च्युतेक्षणम् |
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| अनुवाद |
| आपकी भोली-भाली प्रवृत्ति ने आपको एक सरल हृदय की व्याकुल जिज्ञासा का अनुभव कराया। इस प्रकार आपने प्रत्येक लोक में भगवान अच्युत की खोज का विशेष आनंद प्राप्त किया। |
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| Your innocence made you experience the restless curiosity of a simple heart. Thus, you experienced the special joy of searching for Lord Acyuta in every planet. |
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