श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 245
 
 
श्लोक  2.5.245 
श्री-नारद उवाच
सत्यम् उद्धव तद्-भूमि-
लोकेषु प्रीतिमान् असि
यद् अस्याश्व्-इष्ट-सिद्ध्य्-अर्थम्
आत्थ मन्त्रम् इमं हितम्
 
 
अनुवाद
श्री नारद बोले: हे उद्धव! आपको उस देश के निवासियों पर अवश्य ही बड़ा स्नेह होगा, क्योंकि आपने इस बालक को शीघ्र ही अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए उत्तम सलाह दी है।
 
Sri Narada said: O Uddhava, you must have great affection for the inhabitants of that country, for you have given excellent advice to this boy to fulfill his desire quickly.
तात्पर्य
नारद ने स्वीकार किया कि वृज-भूमि गोप-कुमार के लिए उन्नति करने के लिए सर्वोत्तम स्थान है। श्री पुरुषोत्तम-क्षेत्र में भी वही पूर्णता प्राप्त की जा सकती है, परन्तु केवल धीरे-धीरे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)