सामान्यतः किञ्चिद् इदं मयोक्तं
वक्तुं विशेषेण न शक्यते तत्
प्रेमा तु कृष्णे व्रज-योषितां यस्
तत् तत्त्वम् आख्यातुम् अलं कथं स्याम्
अनुवाद
मैं इस प्रेम के बारे में कुछ सामान्य बातें कह रहा हूँ, लेकिन इसका पूरा विवरण नहीं दिया जा सकता। मैं व्रज की स्त्रियों के कृष्ण के प्रति शुद्ध प्रेम के स्वरूप को कैसे ठीक से बता सकता हूँ?
I am saying some general things about this love, but I cannot give a complete description. How can I accurately describe the nature of the pure love of the women of Vraja for Krishna?
तात्पर्य
प्रेम के सांकेतिक गुण कृष्णावतार के कतिपय भक्तों और श्रीवैकुंठनाथ के सेवकों में दिखाई देते हैं। परन्तु श्रीराधिका तथा उनके अनुयायी जिस तरह श्रीनन्दनन्दन के प्रति प्रेम निवेदित करते हैं, वह इतना असाधारण है कि नारद का कहना है कि उस बारे में बोलने का उनको अधिकार नहीं है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥