श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 212
 
 
श्लोक  2.5.212 
श्री-कृष्ण-देवस्य सदा प्रियं तत्
क्षेत्रं यथा श्री-मथुरा तथैव
तत्-पारमैश्वर्य-भर-प्रकाश-
लोकानुसारि-व्यवहार-रम्यम्
 
 
अनुवाद
वह पुरुषोत्तम क्षेत्र श्री कृष्णदेव को उनके सुन्दर मथुराधाम के समान ही सदा प्रिय है। वहाँ भगवान् अपना परम ऐश्वर्य प्रदर्शित करते हुए भी, संसार के एक साधारण व्यक्ति की भाँति आचरण करके अपने भक्तों को मोहित करते हैं।
 
That supreme region is as dear to Lord Krishna as his beautiful Mathuradham. There, the Lord, while displaying His supreme opulence, captivates His devotees by behaving like an ordinary person.
तात्पर्य
गोप-कुमार इस बात पर जोर दे सकते हैं कि कृष्ण केवल उनकी प्रिय भूमि, व्रज-भूमि में ही अपनी पूरी मिठास के साथ प्रकट होते हैं| और इसलिए गोप-कुमार कहीं और नहीं जाना चाहेंगे| लेकिन यहाँ नारद बताते हैं कि व्रज से भिन्न नहीं, पुरुषोत्तम-क्षेत्र में भी, कृष्ण भगवन्द की अपनी सभी शक्तियों और अपनी सभी मिठास का भी प्रदर्शन करते हैं| भगवान जगन्नाथ का सम्पूर्ण, सर्वशक्तिमान भगवान होना श्री शिव पुराण में पुष्टि करता है:|

आस्तेऽनंतोऽव्ययो विष्णुः

पुराण-पुरुषोत्तमः|

मुक्तिं ददाति यो देवः

सप्तधा भक्त-वत्सलः|

स्मरणाद भक्षणाद यानात्

तथा नामानुकीर्तनात्|

क्षेत्रे वासाद असु-त्यागाद्

दर्शनाच्च यथा तथा||

"असीमित अचूक विष्णु, मूल परम पुरुष, वहाँ (पुरी में) रहते हैं| वह भक्त जो अपने भक्तों पर बहुत दयालु है, सात तरीकों से मुक्ति प्रदान करता है: पुरी में उनके भक्तों को उन्हें याद करने, उनके भोजन के अवशेष खाने, तीर्थयात्रा करने, उनके नामों का बार-बार जप करने, उस आवास में रहने, अपनी प्राणवायु को त्यागने या उन्हें देखने से मुक्ति मिल जाती है| "

श्री स्कंद पुराण पुष्टि करता है:|

यस्मादर्थाज्जगदिदं

सम्भूतं स-चराचरम्|

सोऽर्थो दारु-स्वरूपेण

क्षेत्रे जीव इव स्थितः||

“वह वही व्यक्ति है जिसने इस ब्रह्मांड को उसके सभी चर और अचर प्राणियों के साथ बनाया है, श्री क्षेत्र में लकड़ी के रूप में विद्यमान है|”

इसलिए, क्योंकि कृष्ण व्रज-भूमि की तरह ही पुरी में भी उसी स्वतंत्रता के साथ आनंद लेते हैं, गोप-कुमार को पुरी में वह सब कुछ प्राप्त करने में सक्षम होना चाहिए जो वह चाहते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)