श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 207
 
 
श्लोक  2.5.207 
अतस् तदानीं वैकुण्ठे
न मया ते प्रकाशितम्
परं त्वद्-भाव-माधुर्य-
लोलितो ’त्रावदं कियत्
 
 
अनुवाद
इसीलिए मैंने वैकुंठ में तुम्हें ये बातें नहीं बताईं। यहाँ, केवल तुम्हारे प्रभु-प्रेम के आकर्षण से प्रेरित होकर, मैंने इनके बारे में थोड़ा-सा बताया है।
 
That is why I did not tell you these things in Vaikuntha. Here, moved only by the attraction of your love for God, I have told you a little about them.
तात्पर्य
वैकूंठ में नहीं बल्कि उद्धव के घर द्वारका में ही ये उचित था गोप-कुमार को गोलोक और उनके भक्तो के विषय में बताया जाए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)