श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 202
 
 
श्लोक  2.5.202 
तास् तथैवाहुर् अन्योन्यं
कौरवेन्द्र-पुर-स्त्रियः
पश्यन्त्यो भगवन्तं तं
गच्छन्तं स्व-पुरं ततः
 
 
अनुवाद
राजा युधिष्ठिर की राजधानी की स्त्रियाँ भी भगवान को अपनी राजधानी की ओर जाते देख कर आपस में इसी प्रकार बोल रही थीं:
 
The women of King Yudhishthira's capital, seeing the Lord going towards their capital, were also talking among themselves in the same manner:
तात्पर्य
चूँकि महान विद्वान भीष्म भगवान के व्यक्तित्व की महिमा के बारे में जानते थे, यह समझ में आता है कि उन्होंने गोपियों की ऐसी प्रशंसा की होगी। हालाँकि, और भी अधिक आश्चर्यजनक बात है कि इस तरह के विशेष ज्ञान के बिना महिलाएँ उसी तरह गोपियों की महिमा कर सकती थीं, जैसे हस्तिनापुर की महिलाएँ करती थीं। जैसा कि श्रीमद्-भागवतम (1.10.20) के प्रथम स्कन्ध में वर्णित है:

अन्योन्यम् आसित् संजल्प

उत्तम-श्लोक-चेतसां

कौरवेन्द्र-पुर-स्त्रीणां

सर्व-श्रुति-मनो-हरः

"भगवान के दिव्य गुणों के विचार में लीन, जो श्रेष्ठ कविता में महिमामंडित है, हस्तिनापुर के सभी घरों की छतों पर महिलाएँ उनसे बात करने लगीं। यह बात वेदों के भजनों से अधिक आकर्षक थी।"

श्रील श्रीधर स्वामी बताते हैं: "हस्तिनापुर की महिलाओं की प्रार्थनाओं ने सभी वेदों का ध्यान आकर्षित किया, और इस तरह व्यक्तिगत उपनिषदों ने उन महिलाओं को बधाई दी। क्योंकि महिलाएं कौरव राजा श्री युधिष्ठिर की राजधानी से संबंधित थीं, इसका तात्पर्य यह है कि उनके साथ उनके संबंध के कारण वे निश्चित रूप से इस तरह की अनुभूतियों को बोल सकती थीं।"

इसके अलावा, हस्तिनापुर की महिलाओं ने उनके लिए दर्दनाक संकट के क्षण में उन अनुभूतियों को व्यक्त किया, जब कृष्ण कौरव राजधानी को छोड़कर अपने शहर द्वारका जा रहे थे। कृष्ण का प्रभाव इतना अद्भुत है कि जब कृष्ण उन्हें छोड़ रहे थे, तब भी वे द्वारका और वृंदावन में अपने प्रतिद्वंद्वियों की महिमा कर सकते थे।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)