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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)
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श्लोक 192
श्लोक
2.5.192
अहं वराकः को नु स्यां
तासां माहात्म्य-वर्णने
तथापि चपला जिह्वा,
मम धैर्यं न रक्षते
अनुवाद
मैं तो एक तुच्छ प्राणी हूँ। गोपियों की महिमा का वर्णन करने का मुझे क्या अधिकार है? फिर भी मेरी कुटिल जिह्वा शांत नहीं रह सकती।
I am but a lowly creature. What right do I have to describe the glories of the gopis? Yet my wicked tongue cannot remain silent.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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