अथात्मनो अनुरूपं वै
भजस्व क्षत्रियर्षभम्
येन त्वं आशीषः सत्यः
इहामुत्र च लप्स्यसे
"अब आपको निश्चित रूप से एक अधिक उपयुक्त पति को स्वीकार करना चाहिए, जो शाही आदेश का एक प्रथम श्रेणी का व्यक्ति है जो आपको वह सब कुछ प्राप्त करने में मदद कर सकता है जो आप इस जीवन में और अगले जन्म में चाहते हैं।" (भागवतम 10.60.17) और श्री शुकदेव गोस्वामी वर्णन करते है:
तस्याः सु-दुःख-भय-शोक-विनष्ट-बुद्धेर
हस्ताच् छ्लद-वलयतो व्यजनं पपाता
देहश्च विकलव-धियाः सहसैव मुह्यन्
रंभेव वायु-विहतो प्रविकीर्य केशान
"रुक्मिणी का मन दुख, भय और शोक से अभिभूत था। उसके हाथ से चूड़ियाँ फिसल गईं और उसका पंखा जमीन पर गिर गया। अपने विचलन में वह अचानक बेहोश हो गई, उसके बाल उड़ गए जैसे उसके शरीर हवा से उड़े हुए केले के पेड़ की तरह जमीन पर गिर गया।" (भागवतम 10.60.24)
