एवं तत्-तत्-साधनानां
रीतिर् अप्य् अवगम्यताम्
तज्-ज्ञापकानां शास्त्राणां
वचनानां च तादृशी
अनुवाद
अनुशासन की विधियाँ और उन्हें सिखाने वाले धर्मशास्त्रीय कथनों को, प्राप्त किए जाने वाले विभिन्न लक्ष्यों के अनुसार भिन्न-भिन्न समझा जाना चाहिए।
The methods of discipline and the theological statements that teach them should be understood differently according to the different goals to be achieved.
तात्पर्य
क्योंकि जीवन के कुछ लक्ष्य दूसरों से अधिक लोकप्रिय हैं, विभिन्न महत्वाकांक्षाओं के लिए वैदिक शास्त्र जो अनुशासन सुझाते हैं, उनकी प्रमुखता अलग-अलग होती है। शास्त्र आर्थिक विकास के बारे में अधिक सिखाते हैं, इंद्रिय तृप्ति के बारे में कुछ कम, धार्मिकता के बारे में उससे भी कम, मुक्ति के बारे में फिर से कम और भक्ति भावना के बारे में सबसे कम। अर्थ और काम के लिए शरीर, वाणी और मन के कई कार्य हैं; धर्म के लिए, दान, तीर्थ यात्रा, उचित व्यवहार और तपस्या के व्रत से जुड़ी कम साधनाएँ; और मुक्ति के लिए केवल कुछ तरीके, जैसे अष्टांग योग। और भक्ति योग की सरल साधनाएँ अभी भी कम और कम जानी जाती हैं, जो श्रवण और जप से शुरू होती हैं। इस प्रकार हम समझ सकते हैं कि शुद्ध भक्ति साधना, विशेष रूप से श्री मदन-गोपालदेव के चरणों को समर्पित सेवा, प्राप्त करना कठिन है। और इसलिए, इसलिए भी गोलोक का आध्यात्मिक क्षेत्र; यह केवल मदन-गोपाल के प्रति अखंड भक्ति से ही प्राप्त किया जा सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥