उद्धव ने इशारे से भगवान की ओर संकेत किया कि सभा में उनके समक्ष कौन लोग उपस्थित हैं - वसुदेव, अन्य यादव, अनेक राजा, देवता और ऋषिगण।
Uddhava gestured to the Lord to indicate who was present before him in the assembly – Vasudeva, other Yadavas, many kings, gods and sages.
तात्पर्य
उद्धव ने अपनी भौंहें हिलाईं कि कृष्ण को न केवल वसुदेव और अन्य यादवों की उपस्थिति की याद दिलाई जाए, बल्कि युधिष्ठिर जैसे राजाओं, इंद्र जैसे देवताओं और गर्गाचार्य जैसे ऋषियों की भी याद दिलाई जाए। जैसा कि हमने नारद के दार्शनिक विवरण से समझा है, ये राजा, देवता और ऋषि सभी प्रभु के शाश्वत साथी हैं जो वैकुण्ठ के भीतर द्वारका में निवास करते हैं, जैसे वे पृथ्वी पर द्वारका में निवास करते हैं, प्रभु के उनके आनंद को बढ़ाने के लिए। गोपा-कुमार इनमें से कई भक्तों को फिर से देखेंगे जब वे गोलोक पहुंचेंगे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥