वृत्रास्तुस कथा पापः
सर्व-लोक्युपतापनः
इत्थं दृढ़-मतिः कृष्ण
आसीत् संग्राम उल्बणे
"वृत्रासुर युद्ध की धधकती आग में स्थित था और वह एक कुख्यात, पापी दानव था, जो हमेशा दूसरों को परेशान करने और चिंताएँ देने में लगा रहता था। ऐसा राक्षस इतना कृष्ण-भावनाशील कैसे हो सकता है?" (भागवत 6.14.6)
