श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 173
 
 
श्लोक  2.5.173 
तात तादृश-गोपाल-
देव-पाद-सरोजयोः
विनोद-माधुरीः तां ताम्
उत्सुको ’सीक्षितुं कथम्
 
 
अनुवाद
हे बालक, तुम इन गोपालदेव के चरणकमलों की शरण लेने तथा उनकी मधुर लीलाओं को देखने के लिए इतने उत्सुक कैसे हो?
 
O child, how are you so eager to take shelter of the lotus feet of this Gopaldev and to witness his sweet pastimes?
तात्पर्य
नारद का मन इस सोच से हैरान है कि यह साधारण बालक गोप-कुमार उस अनुभूति को पाने के लिए आग्रही है जिसे बहुत कम लोग पा पाते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)