सर्वआत्मभावोऽधिकृतो
भवतीनाम् अधोक्षजे
विरहेण महाभागा
महान् मेऽनुग्रह: कृत:
"हे गौरवशाली गोपियों, तुमने पारलौकिक भगवान के प्रति अविभाजित प्रेम के विशेषाधिकार का अधिकारपूर्वक दावा किया है। वास्तव में, कृष्ण के लिए अपने प्रेम को उनसे अलग करके प्रदर्शित करके, तुमने मुझे महान दया दिखाई है।" यद्यपि कृष्ण पारलौकिक ईश्वर हैं, अधोक्षज, भौतिक इंद्रियों के लिए अप्रासंगिक, व्रज की गोपियों ने अपनी विशेष भक्ति से उन्हें जीत लिया है। इस प्रकार वे उन्हें कभी भी त्याग नहीं सकते। उद्धव ने गोपियों को सबसे भाग्यशाली और उदार आत्मा होने के रूप में पहचाना, जिन्होंने कृष्ण से अलग होने की पीड़ा का अनुभव किया, जबकि वे उनके साथ आमने-सामने आनंद ले रहे थे।
