हे भगवान्, प्रेम-व्यवहार में यह परम मधुर कौशल! कौन-सा धर्मात्मा मन कृष्ण द्वारा वन में कुलीन स्त्रियों को अपने साथ लाने, उनके साथ कहे गए चतुर वचनों और उनके द्वारा तुरन्त फूट-फूट कर रोने के प्रत्युत्तर से मोहित न हो जाए?
O Lord, this supremely sweet skill in the conduct of love! What pious mind would not be captivated by Krishna's bringing along noble women into the forest, his clever words to them, and their immediate response of bursting into tears?
तात्पर्य
पाठ 151 से 156 तक कृष्ण की रास-लीला के गौरव के बारे में श्रीमद् Bhagwatam के रास-पंचाध्याय नामक पाँच अध्यायों में श्री शुकदेव गोस्वामी के वर्णन का अनुसरण करते हुए विस्तार से बताते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥