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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)
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श्लोक 141
श्लोक
2.5.141
अथापि तत्-प्रसादस्य
प्रभावेणैव किञ्चन
यथा-शक्ति तद् आख्यामि
भवत्व् अवहितो भवान्
अनुवाद
फिर भी, प्रभु की कृपा से, जहाँ तक मेरी शक्ति है, मैं इसके बारे में कुछ कहूँगा। कृपया ध्यान से सुनें।
Nevertheless, by the grace of God, I will say something about it, as far as I can. Please listen carefully.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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