नारद मुनि की प्रस्तुति अब वृंदावन में कृष्ण की लीलाओं की मधुरता पर केंद्रित है। उन्होंने इस मधुरता को उजागर न करने वाली लीलाओं का उल्लेख छोड़ दिया है, जैसे कि गर्ग ऋषि द्वारा किया गया नामकरण समारोह। उस लीला में कृष्ण ने कुछ ख़ास नहीं किया, जिसमें गर्ग ने नंदा और यशोदा को कृष्ण की महिमा के बारे में बताया।
