हालांकि नारद यहां परिपक्व युवावस्था (यौवन) का उल्लेख करते हैं, कृष्ण उस उम्र में तब तक प्रकट नहीं होते हैं जब तक कि वह व्रज को नहीं छोड़ देते। व्रज में कृष्ण तीन आयु में प्रकट होते हैं—कौमार (जन्म से लेकर पांचवें वर्ष के अंत तक), पौगंड (पांच साल के बाद से दसवें के अंत तक), और कैशोर (दस साल के बाद से पंद्रहवें के अंत तक)। पहले दो युग दोनों में से, वह कैशोर उम्र के लिए अधिक उपयुक्त लीलाओं का प्रदर्शन करते हैं, और फिर, दानव केशी को मारने के बाद, वह वास्तव में उस उम्र में प्रवेश करते हैं। इस कारण से, और क्योंकि नारद का कैशोर उम्र में कृष्ण की ओर विशेष आकर्षण है, नारद विशेष रूप से इसका वर्णन करते हैं।
