कृष्ण के सौन्दर्य ने गोपियों के धार्मिक सिद्धांतों को बनाए रखने के निश्चय को हिला दिया, परन्तु इसलिए नहीं कि गोपियाँ केवल स्त्रियाँ थीं, जिनके स्वभाव से अस्थिर माना जाता है। वृज की गोपियाँ एक सम्मानित समाज में प्रतिष्ठित सभ्य महिलाएँ थीं, इसलिए वे लापरवाह व्यवहार के लिए इच्छुक नहीं थीं। वे लक्ष्मी के समान थीं, नारियों में श्रेष्ठ, और उनसे भी बेहतर: वे अधिक सुंदर थीं, और अपने गंभीरता और शर्म में अधिक उदात्त, वे उचित निर्णय लेने में अधिक सक्षम थीं, दृढ़ निश्चय बनाए रखती थीं, और सभी प्रकार की परिस्थितियों से विशेषज्ञता से निपटती थीं, और वे अपने प्रिय की आराधना की विभिन्न गतिविधियों में अधिक सक्षम थीं। इसलिए नारद अपने आश्चर्य और प्रसन्नता व्यक्त करने के लिए हन्त ("वास्तव में") का प्रयोग करते हैं।
