पत्र-पुष्प-फल-छाया-
मूल-वलकल-दारुभिः
गंध-निर्यास-भस्मास्थि-
तोकमैः कामान वितन्वते
"ये पेड़ अपनी पत्तियों, फूलों और फलों, अपनी छाया, जड़ों, छाल और लकड़ी से, और अपनी सुगंध, रस, राख, गूदे और शूट के साथ भी किसी की इच्छाओं को पूरा करते हैं।"
यदि व्रज के पेड़ भी ऐसी अद्भुत शक्तियाँ प्रदर्शित करते हैं, तो व्रज के वैभव को कैसे गुप्त रखा जा सकता है? और फिर व्रज कैसे सर्वोच्च भगवान के लिए एक साधारण व्यक्ति के रूप में लीलाओं का आनंद लेने के लिए एक उपयुक्त स्थान हो सकता है? व्रज उपयुक्त है क्योंकि भगवान उन वैभवों को केवल चुनिंदा उदाहरणों में प्रकट करते हैं, जब वे उनके उद्देश्यों के लिए उपयोगी होते हैं। यदि उनकी कोई विशेष आवश्यकता नहीं है तो वह उन्हें छिपा कर रखता है। इस प्रकार, ईश्वरत्व के वैभव को केवल कभी-कभी व्रज में देखा जाता है, हालाँकि ग्वालों के प्रिय के रूप में भगवान की आकर्षक लीलाएँ हमेशा विस्तार कर रही हैं।
