सच्-चिद्-आनन्द-रूपास् ताः
सर्वास् तत्र विभूतयः
स्वाधीना हि यथा-कामं
भवेयुः सम्प्रकाशिताः
अनुवाद
वैकुंठ में सभी ऐश्वर्य विशुद्ध आध्यात्मिक हैं, शाश्वतता, ज्ञान और आनंद से परिपूर्ण हैं। जब भी कोई चाहे, वे प्रकट होकर, स्वेच्छा से उसके अधीन हो जाते हैं।
All the opulences in Vaikuntha are purely spiritual, filled with eternity, knowledge, and bliss. They appear whenever one wishes, and are willingly subservient to one.
तात्पर्य
आध्यात्मिक राज्य के अनंत प्रकार सच्चिदानंद के अस्तित्व के एक सामान्य आधार को साझा करते हैं। लेकिन वहां ऐश्वर्य की अभिव्यक्ति व्यक्तिगत निवासियों की इच्छाओं पर निर्भर करती है, इसलिए कोई भी अथाह विविधता का सामना करता है। व्यक्तिगत शक्तियाँ वहाँ विशुद्ध रूप से आध्यात्मिक हैं, इसलिए निवासी भौतिक दुनिया में अपनी इंद्रियों का आनंद लेने के लिए नियोजित स्वार्थी जोड़तोड़ के बिना, उन्हें बिना किसी दोष के उपयोग करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥