जो आत्म-संतुष्ट हैं, सभी कामनाओं से परिपूर्ण हैं, और सभी भौतिक चिंताओं से मुक्त हैं, जिन्होंने अपने ज्ञान और संपत्ति का त्याग कर दिया है, जिन्होंने वैष्णवों का संग किया है और इस प्रकार सार और असार के बीच अंतर करने की शक्ति प्राप्त कर ली है—वे ही भक्ति मार्ग में प्रवेश करते हैं। जब मैं वैकुंठ गया, तो मैंने यही स्पष्ट रूप से देखा।
Those who are self-satisfied, free from all desires, and free from all material concerns, who have renounced their knowledge and possessions, who have associated with Vaishnavas and thus gained the power to distinguish between the essential and the non-essential—only they enter the path of devotion. When I went to Vaikuntha, I saw this clearly.
तात्पर्य
यह सही है कि गोपा-कुमार के शिष्य को यह बताया गया है कि केवल प्रत्यक्ष अवलोकन से ही उसे वैकुण्ठ की प्रकृति की सही समझ प्राप्त हो सकती है, फिर भी वह भक्ति-योग के अनुशासन द्वारा मांगे गए उस विशेष विश्वास को प्राप्त करने के लिए कुछ अन्य साधनों की तलाश कर सकता है। इस चिंता की आशा करते हुए, गोपा-कुमार यहाँ उस तर्क का वर्णन करते हैं जिसके द्वारा कोई वैकुण्ठ की असीम सुखदता को सैद्धांतिक रूप से जान सकता है। उन्नत रहस्यवादी जिन्होंने सत्य को उसके अवैयक्तिक पहलू में साकार किया है, वे कभी-कभी वैकुण्ठ को साकार करने के अवसर के लिए ब्रह्म के सुख को त्याग देते हैं। भक्ति सेवा के मार्ग में प्रवेश करने के लिए वे अपने ज्ञान और अपनी पूर्ण रूप से विकसित प्राप्ति दोनों को एक तरफ छोड़ देते हैं। एक बार जब वे वैकुण्ठ जीवन के आनंद का अनुभव कर लेते हैं, तो वे उस चीज़ की निंदा करते हैं जिसे वे पहले अवैयक्तिक प्राप्ति में आनंद मानते थे। यह वैकुण्ठ के चमत्कार का प्रमाण है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥